*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Saturday, October 10, 2020

जब से तुझसे नज़र लड़ गयी

जबसे तुझसे नज़र लड़ गयी
मचल उठा ये मन उन्मादी
पहले प्यार हुआ फिर शादी
तेरे साथ चोंचलों में ही ,
मैंने सारी उमर बिता दी
तेरे साथ साथ रहने की ,
ऐसी आदत मुझे पड़ गयी
जब से तुझसे नज़र लड़ गयी

सांझ सवेरे, पल पल क्षण क्षण
तेरे ख्यालों में खोया मन
ऐसा तूने अपने रंग में ,
मुझे रंग लिया ,ऐ रंगरेजन
मेरे दिल का चैन खो गया , ,
अब तो बात इस कदर बढ़ गयी
जब से तुझसे  नज़र लड़ गयी

कभी ख़ुशी है और कभी गम
हरदम प्यार  हमारा  कायम
तेरा साथ नहीं छोड़ूगा ,
जब तक है मेरे दम में दम
निकल सके ना अब तू दिल से ,
तू दिल में तिरछी हो अड़ गयी
जब से तुझसे नजर  लड़ गयी

घोटू 

No comments: