*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Tuesday, August 4, 2020

उँगलियाँ

फंसा करके उँगलियाँ में उँगलियाँ ,
           साथ चलते ,हम फंसे थे प्यार में
पकड़ ऊँगली ,पहुँच पहुंची तक गए ,
         उलझा ऊँगली ,कुन्तलों के जाल में
पहना ऊँगली में अंगूठी प्रेम से ,
                  साथ पाया,सात फेरे ले लिये
उँगलियों के इशारों पर तुम्हारे ,
                जिंदगी भर ,पूरी नाचा ही किये
बच्चों ने भी पकड़ कर के उँगलियाँ ,
              चलना सीखा ,जिंदगी मे कुछ बने
बुढ़ापे में आज भी वो उँगलियाँ ,
                सहलाती है ,प्यार करती है हमें

घोटू 

No comments: