*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Sunday, July 26, 2020

लड़ाई और मोहब्बत

जहाँ प्यार होता ,है झगड़ा जरूरी
लड़ाई बिना है , मोहब्बत  अधूरी
तुमने न झेली  , अगर दूरियां तो ,
नजदीकियों  का ,मज़ा ही न आता
ये शिकवा शिकायत,ये मान और मनोवल ,
ये लड़ना लड़ाना ,मोहब्बत बढ़ाता

किसी से किसी की ,नज़र जब है लड़ती
तभी तो मोहब्बत , है परवान चढ़ती
लड़ाई मोहब्बत का रिश्ता  निराला ,
हमें भी सुहाता ,उन्हें भी सुहाता
ये शिकवा शिकायत ,ये मान और मनोवल ,
ये लड़ना लड़ाना ,मोहब्बत बढ़ाता

किसी से अगर हम ,मोहब्बत दिखाते
तो ये कहते  है हम ,  लाड है  लड़ाते
बड़ी ही सुहानी ,ये होती लड़ाई ,
दूना मिलन का ,मज़ा  फिर है आता
ये शिकवा शिकायत ,ये मान और मनोवल ,
ये लड़ना लड़ाना ,मोहब्बत बढ़ाता

नहीं रूठना हो ,नहीं हो मनाना
सफर जिंदगी का लगे ना सुहाना
ये कुट्टी और बट्टी ,बड़ी मीठी खट्टी ,
कोई भाव देता ,कोई भाव खाता
ये शिकवा शिकायत ,ये मान और मनोवल ,
ये लड़ना लड़ाना ,मोहब्बत बढ़ाता

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '

No comments: