*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Wednesday, July 1, 2020

चीन पर नुक्ता:चीनी -चंद शेर

हमने चीनी की बना कर चाशनी ,
उनकी  मिठाई बनाई  प्यार से
बदले में बिमारी उनने हमको दी ,
'डाइबिटीज 'पा हुये बीमार से

चीनी मिट्टी बरतनों सी चमकती ,
चीन ने हमको दिखाई दोस्ती
ठेस से हल्की सी ,टूटी चूर हो ,
चीन ने ऐसी निभाई दोस्ती

चीन की जहरीली ड्रेगन संस्कृती ,
सांस में हर एक ,समाया है जहर
मूंछ उग पाती न नीचे नाक के ,
एक होती है इधर और एक उधर

चीन से चूनोचरा (वादविवाद )चलता रहा ,
चुनाचे (फलस्वरूप )चीनेपेशानी (माथे पर बल )हो गई
नुक्ता:चीनी देख अपनी इस तरह ,
चीन को भी परेशानी हो गयी

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

No comments: