*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Thursday, April 16, 2020

दिवास्वपन

जब होते है सीमित साधन और महत्वाकांक्षी होता मन
तब कहते लोग देखते है ,हम दिन में ही बस दिवास्वपन
सबके अपने अपने सपने ,मन में होना है आवश्यक  
हो लक्ष्य नहीं यदि निर्धारित, कैसे पहुंचोगे तुम उस तक
बिन सपने देखे तुम कैसे ,सीखोगे मंजिल से जुड़ना
ना पंख फड़फड़ाओगे जबतक,तुम कैसे सीखोगे उड़ना
कितने करने पड़ते प्रयास ,कितनी ही आती है मुश्किल
जी जान लगा कर करो काम ,तब ही हासिल होती मंजिल
चूमेगी चरण सफलता जब ,साकार स्वपन  हो जाएगा
तुम होंगे व्यस्त ,तुम्हे सोने का समय नहीं मिल पायेगा
दिन में ,ऑफिस में थके हुए ,झपकी सी आएगी जिस क्षण
तुम अगली मंजिल पाने का ,फिर से देखोगे दिवास्वपन

घोटू 

No comments: