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Saturday, December 21, 2019

देवांग की शादी पर

खिली पुष्प सी ,महक रहा चंदन लगती है
समधी का मन ललचाती समधन लगती है
इनको दूल्हे की अम्मा है ,कौन कहेगा ,
सजी धजी सी ,ये खुद ही दुल्हन लगती है

सीधे सादे प्यारे भोलेभाले है
त्यागी साधू योगिराज निराले है
जब से ससुर बने अमरीकन दुल्हन के ,
तब से झूम रहे खुश हो मतवाले है

इधर उधर जो तकता ,नज़र घुमाऊ है
बचपन से जो लड़की रहा  पटाऊ  है  
दुल्हन की अम्मा पर लाइन मार रहा ,,
और कोई ना ,वो दूल्हे का ताऊ  है

आज ख़ुशी से फूली नहीं समाई है
पहने चूनर लाल बड़ी इतराई  है
ढलती हुई उमर में हुई रंगीली है ,
और कोई ना वो दूल्हे की ताई  है

पत्नीव्रत का पालक ,बड़ा जूनिनी है
बात अकल की करता है ,कानूनी है
हर फंक्शन में ,बड़े जोश से नाचा है
देखो देखो वो दूल्हे का चाचा  है

सजीधजी है ,मेडम  अच्छी खासी है
जल्दी सासू बनने की अभिलाषी है
खुश है ,कैसी ठुमक ठुमक कर नाची है
पहचानो तुम ,ये दूल्हे की  चाची  है

लम्बू लगे विदेशी लेकिन देशी है
जिसकी नज़रें तेज एक्सरे जैसी है
गोदी में आहान ,ख़ुशी मुख छाई है
सजाधजा सा ये दूल्हे का भाई है

खिली खिली सी रहती गाल गुलाबी है
मीठी बोली जिसकी सब को भाती  है
जिसने ठानी है कि बने जिठानी वो ,
प्यारी प्यारी वो दूल्हे की भाभी है

घोटू 

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