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Friday, November 15, 2019

क्या इसी दिन के खातिर

है खाली गृहस्थी ,नहीं घर में बस्ती ,
न खुशियां न मस्ती ,तरसती है अम्मा
अगर संग होते ,जो पोती और पोते ,
ये सपने संजोते ,टसकती  है अम्मा
पिताजी बिचारे ,बुढ़ापे के मारे ,
टी वी सहारे ,समय काटते है
है बीबी अकेली ,जो उनकी सहेली ,
उसे प्यार करते ,कभी डाटतें है
भले दो है बच्चे ,और दोनों ही अच्छे
पढ़ लिख के दोनों ही खुश हाल में है
बेटा कनाडा  में डॉलर कमाता ,
और बेटी लंदन में ,ससुराल में है
आ जाते मिलने या छुट्टी मनाने ,
बस कुछ दिनों ,एक दो साल में है
किसी को भी फुर्सत नहीं जो खबर ले ,
कि माँ बाप बूढ़े है ,किस हाल में है
उन्हें पाला पोसा ,पढ़ाया लिखाया ,
और काबिल बनाया ,इसी दिन के खातिर
बड़े  हो ,बुढ़ापे में सेवा करेंगे ,
ये सपना संजोया ,इसी दिन के खातिर
कभी गर्व करते थे काबिल है बच्चे ,
सभी ने मगर कर लिया है किनारा  
अगर एक बच्चा ,निकलता नालायक ,
बुढ़ापे में बनता वो उनका  सहारा


मदन मोहन बाहेती 'घोटू '

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