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Monday, October 28, 2019

दीपावाली मनाई 

कुछ लोगों ने इस तरह दीपावाली मनाई 
गाँठ की लक्ष्मी ख़र्च कर 
ढेर सारे पटाखे लाये
गर्व से इतराये
और लक्ष्मी पूजा के बाद उन्हें जला दिया 
कुछ बच्चे सहमे 
कुछ ने मज़ा लिया 
लोगों ने देखा 
जब उनके पटाखे बोलते थे 
उनका अहम बोलता था 
उनकी आतिशबाज़ी जब ऊँची उड़ती थी 
उनका ग़रूर ऊपर उठता था 
उनका अनार जब फूल खिलाता था 
उनके चेहरे पर फूल खिलते थे 
उन्होंने अपनी लक्ष्मी फूँक
दो घड़ी मज़ा लिया 
पर पर्यावरण बिगाड़ दिया 
घुटन भरे धूमिल वातावरण में 
मुश्किल हो गया लेना साँस
प्रकृति से छेड़छाड़ उन्हें और उनकी आनेवाली पीढ़ी को 
कितनी मँहगी पड़ेगी 
शायद उन्हें नहीं था ये अहसास 

मदन मोहन बाहेती घोटू

1 comment:

Anita Laguri "Anu" said...

.. बिल्कुल सही कहा दो घड़ी मजा लिया पर्यावरण बिगाड़ दिया बहुत ही सार्थक कविता लेकिन बहुत आनंद महसूस किया इस कविता को पढ़ने के बाद लेकिन पर्यावरण को लेकर आपकी चिंता भी जायज है