*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Wednesday, September 25, 2019

दबाब

मिला कर हाथ थोड़ा सा दबाना अपनी आदत है
दबा कर उनको बाहों में ,किया करते मोहब्बत है
दबा एक आँख हौले से ,मारते आँख हम उनको,
 छेड़ते रहते उनको  हम ,उन्हें रहती शिकायत है
कहा आदाब उनने जब ,दबाया हमने तो बोले ,
हसीनो को सताते हो ,बड़ी बेजा ये हरकत है
दबे है हम तो ऐसे ही ,तले  अहसान के उनके ,
हमारे दिल की नगरी पर ,उन्ही की तो हुकूमत है
दबा कर दुम ,दुबकते है ,हम इतना डरते है उनसे ,
नाचते है इशारों पर ,यही सच है,हक़ीक़त  है

घोटू 

No comments: