*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Wednesday, September 25, 2019

हास परिहास

भुला कर जीवन के सब त्रास
न आने  दे  चिंता  को  पास
रहें खुश ,क्यों हम रहे  उदास
आओ हम करे हास परिहास

मिटा कर मन का सारा मैल
किसी से नहीं रखें हम बैर
समझ सब को अपना ,ना गैर
मनाएं सबकी खुशियां ,खैर
हमेशा मस्ती और उल्हास
आओ हम करें हास परिहास

करे जो इधर उधर की बात
 हटा दें चमचों की जमात
सुधर जाएंगे सब हालात
प्रेम की बरसेगी बरसात
बसंती आएगा मधुमास
आओ हम करें हास परिहास

सुने ना ,ये ऐसा वो वैसा
न देखें कंगाली ना पैसा
सभी संग ,हंस कर मिले हमेशा
पाओगे ,जिसको दोगे  जैसा
सभी के बन जाओगे ख़ास
आओ हम करें हास परिहास
 
सुनहरी सुबह रंगीली शाम
रहें हम ,निश्छल और निष्काम
हमेशा मुख पर हो मुस्कान
सभी का भला करेंगे राम
सदा खुशियों का होगा वास
आओ हम करें हास परिहास

न लेना ,देना कोई उधार
सभी में बांटो प्रेमोपहार
रखोगे यदि व्यवहार उदार
मिलेगा तुमको दूना प्यार
कर्म में अपने कर विश्वास
आओ हम करें हास परिहास

तोड़ कर चिताओं का जाल
उड़ें बन पंछी ,गगन विशाल
भुलादो ,बीत गया जो काल
न सोचो ,कल क्या होगा हाल
आज का पूर्ण मज़ा लो आज
आओ हम करें हास परिहास

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '

No comments: