*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Saturday, June 22, 2019

तुझको छूकर

तुझको छूकर सारे दर्द भुला देता मैं
तुझको छूकर ,मौसम सर्द भुला देता मैं
तुझको छूकर ,मन मेरा हो जाता चंचल
तुझको छूकर ,तन में कुछ हो जाती हलचल
तुझको छू कर ,मुझे सूझती है शैतानी
तुझ छूकर ,करने लगता ,मैं मनमानी
मादक तेरी नज़रें जब मुझसे मिलजाती
हो जाता है मेरा मन ज्यादा  उन्मादी
और छुवन जब ,मिलन अगन बन लगती जलने
साँसों के स्वर ,जोर जोर से लगते चलने
पहुंच शिखर पर ,जब ढल जाती ,सब चंचलता
छा जाती है तन में मन में एक शिथिलता
थम जाता सारा गुबार ,उफनाते तन का
ऐसे ही तो होता है बस  अंत छुवन का

घोटू    

No comments: