*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Wednesday, April 17, 2019

पवनपुत्र 

यदि समय असमय हो भोजन 
गेसज पदार्थ का अति सेवन 
ज्यों चना ,मोठ,मूली ,शलजम 
या लवणभास्कर,कृष्णलवण 
जब ये पदार्थ ऊदरस्त हुये
हम पवन पीड़ से त्रस्त हुये
तब ऊदरगुहा उद्दलित  हुयी 
हलचल आंदोलन ग्रसित हुई 
कुछ मुँह से निकली,बन डकार 
कुछ भागी पहुँची गुदा द्वार 
कुछ मौन शांत पर तीक्षण गंध 
कुछ सुरसुर बहती मंद मंद
तो कुछ आती करती निनाद 
दो पाद बीच बन प्रकट पाद 
ये पाद नहीं ,ये पवनपुत्र 
ये शत्रु नहीं ये परम मित्र 
पीड़ा का काम तमाम करे 
ये आये तो आ राम मिले 
बैचैन जान की सुध पाए 
राहत लख मन अति हरशाये
अवसाद मिटे ,आये आह्लाद
उस परम पाद को धन्यवाद 

घोटू

No comments: