*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Tuesday, October 9, 2018

भटकाव 

जिधर ले गयी हवा 
बस उसी तरफ बहा 
मैं तो बस बादल बन ,
यूं ही भटकता रहा
  
न तो अंबर में ही रहा 
न ही धरती पर बहा 
मैं तो बस बीच में ही ,
यूं ही लटकता रहा 

जहाँ मिली शीतलता 
बरसा रिमझिम करता 
सौंधा  सा , माटी में,
मिल कर महकता रहा 

यहाँ वहां ,कहाँ कहाँ 
सुख दुःख ,सभी सहा 
कभी आस ,कभी त्रास 
बन कर खटकता रहा 

मैं तो बस जीवन में 
यूं ही भटकता रहा 

घोटू 

No comments: