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Thursday, September 6, 2018

मैं हूँ ताबेदार तुम्हारा 


  मेरा घर संसार तुम्ही से 

खुशियां और त्योंहार तुम्ही से 

जो भी है सरकार  तुम्ही से 

सारा दारमदार  तुम्ही से 

मुझमे नवजीवन भरता है ,

मेरी सजनी प्यार तुम्हारा 

मैं हूँ ताबेदार तुम्हारा 


चुटकी भर सिन्दूर मांग में ,

डाल फंसाया प्रेमजाल में 

कैद किया मुझको बिंदिया में,

और सजाया मुझे भाल में 

हाथों की हथकड़ी बना कर ,

मुझे चूड़ियों में है बाँधा 

या फिर पावों की बिछिया में,

रहा सिमिट मैं सीधासादा 

एड़ी से लेकर चोंटी तक ,

फैला कारागार तुम्हारा 

मैं हूँ ताबेदार तुम्हारा 


नहीं मुताबिक़ अपने मन के ,

जी सकता मैं ,कभी चाह कर 

पका अधपका खाना पड़ता ,

मुश्किल से ,वो भी सराह कर 

गलती से ,कोई औरत की ,

तारीफ़ कर दी,खैर नहीं है 

'कोर्ट मार्शल 'हो जाने में ,

मेरा ,लगती देर नहीं है 

तुम्हारे डर आगे दबता ,

मन का सभी गुबार हमारा 

मैं हूँ ताबेदार तुम्हारा

 

तुम सजधज कर ,रूप बाण से ,

घायल करती मेरा तनमन 

मात्र इशारे पर ऊँगली के,

नाच करूं मैं कठपुतली बन 

जाने कैसा आकर्षण है 

तुम्हारी मदभरी नज़र में 

बोझा लदे हुए गदहे सा ,

भागा करता इधर उधर मैं 

तुम को खुश रख कर ही मिलता ,

प्यार भरा व्यवहार तुम्हारा 

मैं हूँ ताबेदार तुम्हारा 


मदन मोहन बाहेती 'घोटू '

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