*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Thursday, August 30, 2018

औरतों  का जादू 

ना जाने ,सभी औरतों को ,ये कैसा जादू आता है 
जो मर्द किसी की ना सुनता ,बीबी के काबू आता है 

वह थोड़ा पुचकारा करती ,सहला थोड़ा बहलाती है 
फिर इतना काबू कर लेती ,ऊँगली पर उसे नचाती है 
वह इतना खौफजदा रहता , सब रौब दफ़ा हो जाता है 
ये एक बार की बात नहीं ,ये हरेक दफा  हो  जाता  है 
बीबी जब हुकम चलाती है तो हाकिम भी घबराता है 
ना जाने सभी औरतों को ,ये कैसा जादू आता  है 

एजी,ओजी,के चक्कर में ,फौजी हथियार डाल देता 
पत्नी की बात न टाल सके,औरों की बात टाल देता 
जाता है रोज रोज दफ्तर ,मेहनत करता है महीने भर 
अपनी कमाई सारी पगार ,पत्नी हाथों पर देता धर 
नित खर्चे को पत्नी आगे ,वह हाथ अपने फैलाता है 
ना जाने सभी औरतों को ,ये कैसा जादू  आता है 

पत्नी का मूड नहीं बिगड़े ,परवाह उसे सबसे ज्यादा 
पत्नी पसंद के वस्त्र पहन ,पत्नी पसंद खाना खाता 
कंवारेपन का उड़ता पंछी ,पिंजरे में बंद तड़फता है 
गलती से भी वो इधर उधर ,ना ताकझांक कर सकता है 
था कभी शेर ,अब हुआ ढेर ,भीगी बिल्ली बन जाता है 
ना जाने सभी औरतों को ,ये कैसा जादू  आता है  

जो बात जरा सी ना मानी ,तो बस समझो कि मुश्किल है 
ना चाय ,नाश्ता ना खाना ,कुछ भी तो ना पाता मिल है 
वह अश्रुबाण चला कर जब ,आँखों से मोती  बरसाती 
रखने ना देती हाथ तुम्हे ,और चिढ़ा चिढ़ा कर तरसाती 
फिर हार मान बेचारा पति ,उसके चरणों झुक जाता है 
ना जाने सभी औरतों को ,ये कैसा जादू आता  है 

मदन मोहन बाहेती'घोटू'  


No comments: