*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Monday, August 27, 2018

हम सीधेसादे 'घोटू 'है 

ना तो कुछ लागलगावट है 
ना मन में कोई बनावट  है 
हम है सौ प्रतिशत खरी चीज,
ना हममे कोई मिलावट है
          हम सदा मुस्कराते रहते 
          हँसते  रहते , गाते  रहते 
         जियो और जीने दो सबको ,
         दुनिया को समझाते रहते 
कितना ही वातावरण भले ,
गंदा,दूषित ,दमघोटू  है 
हम सीधेसादे  'घोटू ' है 

ना  ऊधो से लेना  कोई 
ना माधो  का देना कोई 
है हमे पता जो बोयेंगे ,
हम काटेंगे फसलें वो ही 
        इसलिए सभी से मेलजोल 
        बोली में  मिश्री सदा घोल 
        हम सबसे मिलते जुलते है 
        दिल के दरवाजे सभी खोल 
ना  मख्खनबाज ,न चमचे है ,
ना ही चरणों पर लोटू  है 
हम सीधेसादे 'घोटू ' है 

मिल सबसे करते राम राम 
है हमे काम से सिरफ काम 
ना टांग फटे में कोई के ,
ना ताकझांक ना तामझाम 
           हम सीधी राह निकलते है 
           कुछ लोग इसलिए जलते है 
           है मुंह में राम ,बगल में पर ,
           हम छुरी न लेकर चलते है 
अच्छों के लिए बहुत अच्छे ,
खोटो के लिए पर खोटू  है 
हम सीधेसादे 'घोटू ' है 

मदनमोहन बाहेती 'घोटू '

No comments: