*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Saturday, August 18, 2018

bhagwan too bniya hai

  भगवान तू  बनिया है

इस धरा पर इतने 
अवतार लिए  तूने
बनिये के घर अभी तक,
अवतार ना लिया है
भगवान तू बनिया है
जब काम से थके तो
घर पर ना रह सके तो
ये आजकल का फेशन
जाते है हिलस्टेशन
कर पार लम्बी दूरी
शिमला कभी मसूरी
तो ठीक इस तरह से
तंग आके गृह कलह से
ऊबा जो उधारी से
तकड़ी से ,तगारी से
तो हार करके आया
अवतार धर के आया
सच कहा है किसीने
औरों की थालियों में
दिखता अधिक ही घी है
ये बात भी सही है
बनिया तो रह चुका था
उस काम से थका था
बनिया नहीं बना तू
छोड़ी बही,तराजू
और धनुष बाण धारा
या फरसा फिर संभाला
क्षत्रिय बना, ब्रह्मण
बलराम और वामन
था मच्छ कच्छ जलचर 
बन कर वाराह थलचर
नरसिंह भी बना पर
तू बन न पाया नभचर
डरता है उल्लूओं से
पत्नी के वाहनों से
कितने ही रूप धारे
पर बनिया  ना बना रे
बदला है रूप केवल,
बनने से होता क्या है
भगवान तू  बनिया है 
सच  कह् दूं इस बहाने
जो तू बुरा न माने
चोला भले था झूंठा
बनिया पना ना छूटा
मछली से तेज चंचल
बनिये का गुण ये अव्वल
कछुवे सी पीठ करले
बनिया पहाड़ धरले
थोडा भी ना हिले वो
पर  रत्न जब मिले तो
एक बात तो बता तू
वाराह क्यों बना  बना तू 
भू पर न कर लगाया
दांतों से क्यों उठाया
ये ही दिखने केवल
दांतों में है कितना बल
दाँतों ने टोह  करदी 
है रत्नगर्भा  धरती 
लाया उसे तू बाहर 
पाने को रत्न सुंदर 
वामन बना तू नाटा 
बनिये के गुण  दिखाता 
क्या कहूं में छली को
ठग ही लिया बली को
छोटा सा पग बढाया 
धरती को नाप आया
बनिया व्यापार कर ले 
दस के हज़ार कर ले 
जो धन मिले तो नर है
साक्षात् ईश्वर है
पैसा जो कम जरा रे
तू सिंह सा दहाड़े
नरसिंह स्वरुप है तू
बनिये का रूप है तू
तू कृष्ण बना राजा
तू राम बना राजा
सोने के मृग पे दौड़ा
बनिया पना न छोड़ा
पूँजी पति है बनिये
लक्ष्मी पति है बनिये
ये बात भी सही है
तू लक्ष्मी पति है
मतलब की तू है बनिया
मै झूंठ कह रहा क्या
हर रूप तेरा भगवन,
बनिये के गुण लिया है
भगवान तू बनिया  है

No comments: