*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Thursday, July 5, 2018

पके हुए फल 

हम तो पके हुए से फल है ,कब तक डाली पर लटकेंगे 
गिरना ही अपनी नियति है ,आज नहीं तो कल टपकेंगे 
इन्तजार में लोग  खड़े है ,कब हम टपके ,कब वो पायें 
सबके ही मन में लालच है ,मधुर स्वाद का मज़ा उठायें 
देर टपकने की ही है देखो,हमको पाने सब झपटेंगे 
हम तो पके हुए से फल है ,कब तक डाली पर लटकेंगे 
ज्यादा देर रहे जो लटके ,पत्थर फेंक तोड़ देंगे  वो 
मीठा गूदा रस खा लेंगे ,गुठली वहीँ छोड़ देंगे  वो 
ज्यादा देर टिक गए तो फिर ,सबकी आँखों में खटकेंगे 
हम तो पके हुए से फल है ,कब तक डाली पर लटकेंगे 
गिरना ही अपनी नियति है ,आज नहीं तो कल टपकेंगे 

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '

No comments: