*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Friday, July 20, 2018

अचार 

कच्ची सी अमिया ,अगर पक जाती 
तो मधुर रस से भर जाती 
निराला स्वाद देती 
खाने वाले को आल्हाद देती 
पर बेचारी को ,बाली उमर में रोना पड़ा 
स्वाद के मारों के लिए ,कुर्बान होना पड़ा 
टुकड़े टुकड़े होकर कटना पड़ा 
चटपटे मसालों से लिपटना पड़ा 
और आने वाले साल भर तक ,
लोगों को चटखारे देने को तैयार हो गयी 
सबका प्यार हो गयी 
कोई भी चीज का ,
जब अधकचरी उमर में ,
इस तरह बलिदान दिया जाता है 
और बाद में दिनों तक ,
उसके स्वाद का मज़ा लिया जाता है 
इसे पूर्णता प्राप्त किया हुआ ,
अधूरा अफसाना कहते है 
जी हाँ इसे अचार बनाना कहते है 

मदनमोहन बाहेती 'घोटू '

No comments: