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Monday, April 9, 2018

प्रतिबंध लग गया 

पन्ना तो जड़ गया अंगूठी ,पन्नी पर प्रतिबंध लग गया 
फटी जीन तो फैशन में है ,कुरते पर पैबन्द लग गया 
नेताजी ने कर तो डाले ,वादे कई ,निभा ना  पाये ,
हेरा फेरी में उलझे है  , राजनीती में  गंद  लग गया 
कल तक एक नादान  बालिका,जो घबराती थी गुंडों से ,
उसने आज रपट लिखवाई ,उसके पीछे संत लग गया 
कितने ही जल्लाद मोहम्मद  गौरी उसको घेर रहे है,
पृथ्वीराज ,परेशाँ ,उसके पीछे अब जयचंद लग गया 
जब तक बंधा  गले में पट्टा था बस कुछ गुर्रा लेता था ,
किन्तु भोंकता सबके पीछे ,कुत्ता अब स्वच्छंद ,लग गया 
 अच्छा खासा काम चल रहा था पर उनने टांग अड़ा दी ,
दाल भात में जैसे आकर ,कोई मूसरचंद  लग गया 
मुफ्त बंटेंगे कंबल का एलान हुआ तो भीड़ लग गयी ,
मुश्किल से लाइन में जाकर ,पीछे जरूरतमंद लग गया 
कल तक जो आजाद ,मस्त था,मौज मारता खुल्लमखुल्ला,
जबसे शादी हुई  दुखी है ,क्योंकि गले में फंद लग गया 
एक साथ मिल कर रहते थे ,बंधा हुआ एक परिवार था ,
पर अब, घर बंटवारे पीछे ,अपना भाईबंद लग गया 
लायक बेटे है विदेश में , नालायक घर ,करता सेवा ,
वृद्ध और लाचार पिता को ,'घोटू 'वही पसंद लग गया 

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '

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