*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Sunday, August 27, 2017

          क्या करें 

आदतें  बिगड़ी  पड़ी है ,क्या करें 
आशिक़ी सर पर चढ़ी है ,क्या करें 
बीबी हम पर रखती हरदम चौकसी ,
मुसीबत बन कर  खड़ी है,क्या करें 
कहीं नेता ,कहीं बाबा  लूटते,
अस्मतें ,सूली चढ़ी है  ,क्या करें 
काटने को दौड़ती है हर नज़र,
हरतरफ मुश्किल बड़ी है,क्या करें 
जिधर देखो उधर घोटाले मिले ,
हर तरफ ही गड़बड़ी है ,क्या करें 
किसी को भी ,किसी की चिंता नहीं,
सभी को अपनी पड़ी है ,क्या करें 
चैन से ,पल भर कोई रहता नहीं,
सबको रहती हड़बड़ी है ,क्या करें 
'घोटू'करना चाहते है बहुत कुछ ,
जिंदगी पर, दो घड़ी है,क्या करें 

मदन मोहन बाहेती 'घोटू '

No comments: