*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Thursday, October 8, 2015

गौमाता और मातापिता

         गौमाता और मातापिता

बचपन से अब तक तुमको, दूध पिलाया,पोसा,पाला
दूध हमारा ही पी पी कर ,हुआ हृष्ट पुष्ट ,बदन तुम्हारा
जब तक देती रही दूध हम,गौमाता कह,चारा डाला
दूध हमारा बंद हुआ तो, हमको भेज दिया  गौशाला
हम पशु है पर संग हमारे ,क्या ये अत्याचार नहीं है
हम क्या,अपने मातपिता संग,तुम्हारा व्यवहार यही है
जिनने खून पसीना देकर ,तुम्हे बनाया इतना काबिल
तिरस्कार करते हो उनका ,उनसे सब कुछ करके हासिल
तुमको लेकरउनने मन में ,क्या क्या थे अरमान जगाये
अपने पैरों खड़े क्या हुए ,वो लगते अब तुम्हे पराये
बहुत दुखी,पछताते होंगे,और सोचते होंगे मन में
निश्चित ही कुछ कमी रह गयी ,उनके ही लालन पालन में
दुर्व्यवहार देख तुम्हारा , डूबे रहते होंगे गम में
हमको भेजा गौशाला ,उनको भेजोगे  वृद्धाश्रम में

मदन मोहन बाहेती'घोटू' 

No comments: