*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Wednesday, October 21, 2015

हमवतनो से

       हमवतनो से

यह कह कर वो मुसलमान ,तू हिन्दू है
मारकाट कर ,झगड़ रहा आपस में तू है
गाय और सुवर के चक्कर में पड़ कर के,
आपस में तूने नफरत फैलाई क्यूँ  है
नेता लोग रोटियां अपनी सेक रहे है
और पड़ोसी ,चटखारे ले देख रहे है
साथ साथ कितने वर्षों से रहते आये,
भाई भाई से,हिन्दू मुस्लिम एक रहे है
कुछ भी दे दो नाम,राम हो चाहे अल्लाह ,
परमपिता वो ऊपरवाला ,एक प्रभू  है
आपस में तूने नफरत फैलाई क्यूँ  है
मंदिर हो ,मस्जिद हो चाहे हो गुरद्वारे
पूजा के स्थल ,ईश्वर के घर है सारे 
अपने अपने धर्म ,आस्था अपनी अपनी ,
मिलजुल रहते,आपस में थे भाईचारे
नेता उल्लू साध रहे तुमको लड़वाकर ,
एक तरह का लाल ,तुम्हारा ,मेरा खूं है
आपस में तूने नफरत फैलाई क्यूँ है 

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

No comments: