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Sunday, August 16, 2015

भावेश - नीलम आदित्य

भावेश
समष्टि की संरचना है
अभिप्राय की संवेदना है
अंतर की सोई हुई चेतना है
भावेश
टच एन्ड गो है
आफ एन्ड आन है
प्राण की पहचान है
जीने वाले की शान है
भावेश
आंतरिक सकुचाहट है
दिल की आहट है
प्राण से प्राण की जोड़ है
जिन्दगी की मोड़ है
भावेश
प्राण का  मानसिक भाव है
प्राण की भाषा है
क्रिया का सहज प्रभाव है
भावेश प्रकाश का उद्दगार है
जनकवि - नीलम आदित्य













कोसीर सारंगढ़

९६८५३६८४०२ 

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