*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Sunday, August 23, 2015

वर्षा का पानी

           वर्षा का पानी

बरस बरस वर्षा का पानी ,सबके मन को हर्षाता है
पर जब शैतानी पर आता ,तो सड़कों पर भर जाता है   
नन्हे नन्हे छोटे बच्चे ,जब उसमे छप छप करते है,
भरते निश्छल सी किलकारी,तो उसको प्यारे लगते है
वो जब खुश हो भीगा करते ,इसका मन भी मुस्काता है
बरस बरस वर्षा का पानी,सबके मन को  हर्षाता  है
कई सुंदरी और सुमुखियां,संभल संभल कर आती,जाती
अपने वस्त्रों को ऊँचा कर,निज पिंडली दर्शन करवाती
नारी तन स्पर्श उसे जब मिलता ,पागल  हो जाता है
बरस बरस वर्षा का पानी ,सबके मन को हर्षाता है
कुछ मंहगे ,गर्वीले वाहन,तेज गति से है जब आते
कोशिश करते ,करें पार हम ,आसपास छींटे उड़वाते
बेचारे ठप होते जब ये ,साइलेंसर में घुस जाता  है
बरस बरस वर्षा का पानी सबके मन को हर्षाता है
बरसा करता जब ऊपर से ,मानव छतरी ले बचता है
पर सड़कों पर बच ना पाता ,वो नंगे पैरों चलता है
तरह तरह के देख नज़ारे ,उसको बड़ा मज़ा आता है
बरस बरस वर्षा का पानी ,सबके मन को हर्षाता है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

No comments: