*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Sunday, August 9, 2015

हार का दर्द

           हार का दर्द

मिली शिकस्त ,हुआ पस्त ,बड़ा त्रस्त दुखी,
            हो गया अस्त व्यस्त ,ऐसा लगा झटका है
बड़ी बेदर्द , बड़ी बेवफा  ,ये   पब्लिक है ,
            अर्श से फर्श पर लाकर के कहाँ  पटका है
कभी पुश्तैनी जो होती थी कुर्सी सत्ता की ,
           ध्यान पी एम की कुर्सी पे अब भी अटका है
हार का दर्द क्या  ,पूछे ये कोई राहुल से ,
          मन में मोदी का सदा ,बना रहता  खटका है

घोटू

No comments: