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Friday, January 30, 2015

शादी-चार चित्र

              शादी-चार चित्र
                        १
एक खाली होता हुआ घोसला ,
एक चुसा हुआ आम
एक मधु विहीन छत्ता
फिर भी मुस्कान ओढ़े हुए ,
एक निरीह इंसान
दुल्हन का बाप
                   २
वर का पिता
गर्व की हवा से भरा गुब्बारा
रस्मो के नाम पर ,अधिकारिक रूप से,
 भीख मांगता हुआ ,दंभ का मारा
एक ऐसा प्राणी ,
जिसका पेट बहुत भर चुका है पर
फिर  भी कुछ और खाने को मिल जाए,
इसी जुगाड़ में तत्पर
सपनो में डूबा हुआ इंसान
मन में दादा बनने का लिए अरमान
                       ३
बेंड बाजे के साथ ,
मस्ती में नाचते हुए ,उन्मादी
व्यंजनों से भरी प्लेटों को ,
कचरे में फेंकते हुए बाराती
                      ४
दहेज़ के नाम  पर,
अपने बेटे का सौदा कर
अच्छी खासी लूट खसोट के बाद
खुश था  दूल्हे का बाप
लड़कीवालों ने अपने दामाद को ,
दहेज़ में दी है एक बड़ी कार
और बहू के नाम ,एक अच्छा फ्लेट दिया है ,
शायद वो अनजान थे कि उन्होंने ने,
इनके परिवार में,
विभाजन का बीज बो दिया है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'
 

2 comments:

ऋषभ शुक्ला said...

आपका ब्लॉग मुझे बहुत अच्छा लगा, और यहाँ आकर मुझे एक अच्छे ब्लॉग को फॉलो करने का अवसर मिला. मैं भी ब्लॉग लिखता हूँ, और हमेशा अच्छा लिखने की कोशिस करता हूँ. कृपया मेरे ब्लॉग पर भी आये और मेरा मार्गदर्शन करें.

http://hindikavitamanch.blogspot.in/
http://kahaniyadilse.blogspot.in/

डॉ. हीरालाल प्रजापति said...

मजेदार रचना.......ऐसा होता है फिर भी यह पूर्ण सत्य नहीं