*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Sunday, January 11, 2015

शादीशुदा जिंदगी

   शादीशुदा जिंदगी

 बड़ी तीखी कुरमुरी सी
 स्वाद से लेकिन भरी सी
जिंदगी शादीशुदा की,
है पकोड़ी चरपरी सी
मज़ा लेकर सभी खाते ,
भले खाके करते सी सी
सभी के मन को सुहाती,
चाट है ये चटपटी सी
जलेबी सी है रसीली ,
भले टेढ़ी ,अटपटी सी
पोल कितनी भी भले हो,
मगर बजती बांसुरी सी
मुंह  जलाती सभी मिर्चे ,
लाल,काली या हरी सी
लगी मुंह से नहीं छूटे ,
सर्दियों में मूंगफली सी
कैसी भी हो,प्यार करती ,
बीबियाँ, लगती  परी सी

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

No comments: