*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Friday, December 19, 2014

एसा लगता है वो हमसे नाराज है आज सूरज ने सूरत दिखाई नहीं बेरुखी देख उसकी खफा हम हुये हमने सर से हटाइ रजाइ नहीं धूप के रूप का गर न जलवा दिखे तो जरूरी नहीं हम ठिठुरते रहे कम से कम परवाने तो जलेगे नहीं जो अगर उनने शमा जलाई नहीं घोटू

No comments: