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Wednesday, October 8, 2014

फलों की चाट

      फलों की चाट

कच्चे आम हरे होते है ,पक जाते तो होते पीले
खट्टे और सख्त होते है,पकते, होते नरम,रसीले
सारा खट्टापन खो जाता ,पकने पर आता मिठास है
छाजाती मनभावन खुशबू,और आजाता मधुर स्वाद है 
होते पुरुष ,फलों के जैसे ,बदला करते ,साथ उमर के
खट्टे भी है,मीठे भी है ,सुख देते सबको जी भर के
किन्तु औरतें ,मिर्ची जैसी ,इनको नहीं बदलना आता
रंग बदलता,साथ उमर के,किन्तु चरपरापन ना जाता
होती है जब ,हरी छरहरी,पकती  होती सुर्ख लाल है
रंग बदले पर तीखी रहती ,नहीं बदलती ,मगर झाल है
जितनी पतली और छरहरी ,उतनी अधिक चरपरी होती
ज्यों ज्यों  मोटी होती जाती,त्यों त्यों तीखापन है खोती
लोंगा मिर्ची आग लगाती ,मन भाती शिमला मिर्ची है
काली,लाल,हरी,पीली हो ,लेकिन मिर्ची तो मिर्ची  है
दुबली और छरहरी औरतें ,होती तीखी,नखरेवाली
जैसे जैसे होती मोटी ,वैसे वैसे  होती  'जॉली'
फल से पुरुष,औरतें मिर्ची ,फिर भी रहते साथ साथ है
तभी चटपटा ,चाट सरीखा, जीवन होता ,बड़ा स्वाद है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

2 comments:

देवदत्त प्रसून said...

साधुवाद !विषयानुसार स्वादु रचना !

देवदत्त प्रसून said...

साधुवाद !विषयानुसार स्वादु रचना !