*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Tuesday, September 2, 2014

          स्मार्टवाच
नाचते जिसके इशारों पर उमर सारी रहे ,
        हमने अपनी कलाई पर ,उनकी फोटो खींच ली
स्मार्ट है ये वाच या फिर हो गए हम स्मार्ट है,
      कैद मुट्ठी पर किया और मिटा अपनी खीज ली            
घोटू

                    दीवानगी
चाँद बादल में छिपा पर देते उसको अर्घ्य है ,
            ये हमारी आस्था और श्रद्धा की है बानगी
तुमने घूंघट में छिपा कर रखा अपना चन्द्रमुख,
      फिर भी तुम पर मर मिटे ,ये हमारी दीवानगी 
घोटू

                    बरकत
आपका सजना संवरना ,सबका सब बेकार  है ,
       जिंदगी में आपकी जो किसी से चाहत नहीं
कितने ही स्वादिष्ट सुन्दर,आप व्यंजन पकाएं ,
      कोई यदि ना सराहे ,होती सफल मेहनत नहीं
हरे पीले लाल नीले ,कितने भी रंगीन हो ,
      फूलों में खुशबू नहीं तो काम की रंगत नहीं
बिन पसीना बहाये ,आये ,न हो ईमान की,
     'घोटू' ऐसी कमाई में ,होती है बरकत नहीं
घोटू
             चाय की चुस्की
चाहते जो आप जीना मस्ती से सारी उमर ,
     रोज पीना चाहिए फिर दार्जिलिंग की 'ब्लेक टी'
कड़क खुशबू भरी होती चाय भी आसाम की,
     एक प्याला पी लिया तो आ जाती है ताजगी
जीने यदि चाव है,दिल में किसी की चाह है ,
    चाहते हो खुशी से कट जाए सारी   जिंदगी
छोटी छोटी पत्तियों में जोश का जादू भरा,
     चुस्ती लाती है बदन में  ,एक चुस्की चाय की

घोटू   

No comments: