*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Sunday, July 13, 2014

Re: तीन चतुष्पद



On Thursday, July 10, 2014, madan mohan Baheti <baheti.mm@gmail.com> wrote:
           तीन चतुष्पद
                    १
तुम्हारा रूप प्यारा है,अदाएं शोख और चंचल
तुम्हारी चाल मतवाली, कमर में पड़ने लगते बल
बुलाता,पास ना आती,हमेशा टालती ,कह ,कल
कलेजा चीर देती हो ,जब कहती हो हमें अंकल
                         २
हसीना को पटाने में ,पसीने छूट जाते  है
हसीना मान जाती तो पसीना हम बहाते है
प्यार के बाद शादी कर,बोझ बढ़ जाता है सर पर , 
गृहस्थी को चलाने में ,पसीने छूट जाते है
                            ३
मेरी तारीफ़ करते ,लक्ष्मी घर की बताते हो
कमा कर दूसरी फिर लक्ष्मी तुम घरपे लाते हो  
मेरी सौतन को जब मैं खर्च कर ,घर से भगाती हूँ,
मुझपे खर्चीली होने की,सदा तोहमत लगाते  हो

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

No comments: