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Sunday, July 6, 2014

ग़म ही गम

      ग़म ही गम

गमो के गाँव में आकर ,गए हम भूल मुस्काना ,
पड़ गयी मुश्किलें पीछे ,ग़मों की इतनी शिद्दत है
न कोई सूझता रस्ता,अँधेरा ही अँधेरा  है,
सुखों की साख बिगड़ी है, मुसीबत ही मुसीबत है

घोटू 

1 comment:

देवदत्त प्रसून said...

मन की बात खूब कही है !