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Saturday, July 12, 2014

दीवानगी

      दीवानगी
दीवान ए आम हो चाहे ,
दीवान ए ख़ास हो  चाहे
दीवानो का दीवानापन तो खुल्ले आम होता है
दीवानो के लिए ना ,
कोई भी दीवार होती है,
दीवानो का  लिखा खत,प्यार का दीवान होता है
   बजाते   बांसुरी कान्हा ,
  दीवानी  गोपियाँ  आती ,
दीवानापन  ये ,उनके प्यार की पहचान  होता  है
दीवाना  होता  परवाना ,
शमा के प्यार में जलता ,
कोई मजनू ,कोई राँझा ,सदा  कुर्बान होता है

मदन मोहन  बाहेती 'घोटू' 

1 comment:

देवदत्त प्रसून said...

वाह क्या खूब र ! गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामना ! विषयानुकूल गंभीर रचना