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Tuesday, July 29, 2014

आया सावन झूम के

आया सावन झूम के 


जब ठंडी हवाओं के झोंके चलने लगे 
मिटटी की सोंधी सोंधी खुसबू महकने लगे 
पेड़ पोधे जब ख़ुशी से झूमने लगे 
चारों तरफ हरियाली छाने लगे 
   रिमझिम फुआरें तन मन को भिगाने लगे 
प्रियतम की जब मीठी मीठी याद सताने लगे 

तो समझो आया सावन झूमके 

जब मीठे मीठे अरमान जगाने लगे 
दिल प्यारे प्यारे गीत गुनगुनाने लगे 
चूड़ी ,बिंदिया,कंगना सजने लगे 
पेड़ों पर झूले पडकर पेंग चढ़ने लगे
मौसम में चारों तरफ मदहोशी छाने लगे 
                 पानी की नन्ही नन्ही बूंदे पत्तों पर झिलमिलाने लगे 

तो समझो आया सावन झूम के 

पपीहा पीहू पीहू कर बुलाने लगे 
कोयल कूहू कूहू कर गीत गाने लगे 
रिमझिम के गीत सावन गुनगुनाने लगे 
तन मन मयूर बन आँगन में नाचने लगे 
रेशमी हवाओं के झोंके दिलों को गुदगुदाने लगे 
 धानी चुनरियाँ हवाओं में लहराने लगे 

तो समझो आया सावन झूमके 



  




4 comments:

रविकर said...

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवारीय चर्चा मंच पर ।।
साया बापू का उठा, *रूप-चन्द ग़मगीन :चर्चा मंच 1690

Pratibha Verma said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

कालीपद प्रसाद said...

सावन पर बहुत खुबसूरत रचना |
अच्छे दिन आयेंगे !
सावन जगाये अगन !

मन के - मनके said...

सावन से सरोबार प्रस्तुति