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Monday, June 23, 2014

तोहमत

        तोहमत

मेरी तारीफ़ करते ,लक्ष्मी घर की बताते हो
कमा कर दूसरी फिर लक्ष्मी तुम घर पे लाते हो
मेरी सौतन को जब मैं खर्च कर ,घर से भगाती हूँ,
मुझे खर्चीली कह कर के ,सदा तोहमत  लगाते  हो

घोटू

2 comments:

Sanju said...

बहुत ही शानदार और सराहनीय प्रस्तुति....
बधाई मेरी

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पर भी पधारेँ।

कविता रावत said...

Woh!