*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Tuesday, May 13, 2014

गर्मी में शीतलता

       गर्मी में शीतलता

तेज ताप  से जब सूरज के ,दग्ध ह्रदय हो जाता
होंठ सूखते,प्यास सताती ,मन विव्हल हो जाता
तेरी जुल्फों के साये की   ठंडक में जी  लेते
तेरी अमराई में आकर ,अमरस कुछ पी लेते
ग्रीष्म ऋतू में पर्वत पर जा ,शीतल होता मौसम
हमको तो तेरा पहलू ही ,लगता हिल स्टेशन 
तेरी जुल्फ घटायें  बन कर,जब हम पर छा जाती
शीतल करती रूप छटा और मन प्रमुदित  कर जाती

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

No comments: