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Friday, May 30, 2014

मॉडर्न बीबियाँ

          मॉडर्न बीबियाँ

सुनती हैं इस कान से ,उस कान से देती निकाल ,
बात अपने पतियों की,भला सुनता  कौन है
आजकल इस बात की भी उनको है फुर्सत नहीं,
कान में अब लगा रहता ,उनके ईयर फोन है
हाथों में ले हाथ ,हमसे बात करते थे कभी,
दास्ताँ बन रह गए है ,वो पुराने दिन सभी ,
क्योंकि उनके हाथ में है रहता मोबाईल सदा ,
हो गया दिल उनका अब 'डू नाट डिटर्ब 'झोन 'है

घोटू  

1 comment:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (31-05-2014) को "पीर पिघलती है" (चर्चा मंच-1629) पर भी होगी!
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'