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Thursday, April 24, 2014

Life is Just a Life: मुक्तक - तेरे बिन

Life is Just a Life: मुक्तक - तेरे बिन:

मुक्तक -
तेरे बिन

तुझको जीतूँ
लक्ष्य है मेरा, तुझसे जीत नहीं चहिए,
तेरी जीत
में जीत हमारी, तेरी हार नहीं चहिए,
तू मेरा प्रतिमान
किरन है, जो मैं सूरज हो जाऊँ,
तू मेरा सम्मान
किरन है, जो मैं सूरज हो जाऊँ,
तेरे बिन
उगने ढलने का भी, अधिकार नहीं चहिए,


तेरे बिन
जीने मरने का भी, अधिकार नहीं चहिए।

4 comments:

Tushar Raj Rastogi said...

आपको यह बताते हुए हर्ष हो रहा है के आपकी यह विशेष रचना को आदर प्रदान करने हेतु हमने इसे आज के ब्लॉग बुलेटिन - रे मुसाफ़िर चलता ही जा पर स्थान दिया है | बहुत बहुत बधाई |

रश्मि शर्मा said...

Waah...bahut khoob

Anju (Anu) Chaudhary said...

वाह बहुत खूब

संजय भास्‍कर said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
साझा करने के लिए आभार।