*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Tuesday, December 10, 2013

Life is Just a Life: कुछ तेरे हत्यारे हैं Kuch tere hatyarein hain

Life is Just a Life: कुछ तेरे हत्यारे हैं Kuch tere hatyarein hain: संसद चौपाटी में बैठे जुगनू बन कर तारे हैं, कुछ तेरे हत्यारे हैं कुछ मेरे हत्यारे हैं। जंगल से निकल कर चोर उचक्के दरबारों में जा बैठे...

No comments: