*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Thursday, December 26, 2013

      कुछ  इंग्लिश -कुछ हिंदी

बन्दर जैसा उछला करता ,ऐसी हालत होती मन की
इसीलिये इंग्लिश भाषा में ,बन्दर को कहते है  मन्की
और उँगलियाँ तो औरत की ,होती है नाज़ुक और सुन्दर
तो फिर भिन्डी को इंग्लिश में ,क्यों कहते है 'लेडी फिंगर'
'बुल 'याने कि सांड होता है ,टकराते इंग्लिश के दो'बुल'
तो हिंदी में बन जाती है ,प्यारी और नाजुक सी 'बुलबुल'
होता है 'लव गेम'शून्य का,सदा खेल में बेडमिंटन के
पर हिंदी में 'खेल प्यार का',कितने फूल खिलाता मन के

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

No comments: