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Saturday, December 14, 2013

शैल रचना: एक दीवाना ऐसा भी

शैल रचना: एक दीवाना ऐसा भी: हटा दो लाज का  पहरा      सबर आँखों का जाता है            मेरी बेचैन चाहत को                अदा नायाब भाता है।  काली घटा सी जुल्फ...

1 comment:

देवदत्त प्रसून said...

सभी सुधी रचनाकारों को गीता-जयंती की वधाई !
यों ही साहित्य से जुड़े रहें !