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Saturday, December 14, 2013

बेचारा आदमी

         बेचारा आदमी

कितना भला ,मासूम सा है प्यारा आदमी
कहता है कौन ,होता है बेचारा    आदमी
उसको दुधारू जीव समझ बड़े प्यार से ,
डाले है बीबी ,और  खाता ,चारा आदमी
उसकी कदर होती है घर में सिर्फ इसलिए ,
पैसा कमाके लाता ,ढेर सारा  आदमी
करती है ऐश बीबियाँ ,और काम में जुटा ,
बन कोल्हू  बैल,घूमता ,दिन सारा आदमी
ऐसा क्या लॉलीपॉप चुसाती है बीबियाँ ,
लालच में जिसके फिरता मारा मारा आदमी

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

1 comment:

देवदत्त प्रसून said...

सभी सुधी रचनाकारों को गीता-जयंती की वधाई !
सचमुच बहुत सही प्रस्तुति !!