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Wednesday, November 27, 2013

तहलका

              तहलका
तरुण भी है,तेज भी है ,कलम में भी जोर है ,
कितनो का ही भंडा फोड़ा,जब भी मिल मौक़ा गया
लिफ्ट में एक रूपसी ने लिफ्ट उनको नहीं दी ,
बात बिगड़ी इस तरह कि तहलका सा मच  गया

घोटू

1 comment:

दे४व्दुत्तप्रसून said...

शुभ प्रात:काल !चुटीला व्यंग्य हैं !!