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Saturday, October 26, 2013

आजकल


सब पूछते हैं आकर शैल क्या छोड़ दिया है फन 
क्या बताऊँ उन्हें मैं कैसे कितना नाशाद है मन । 

सतत प्रयास जारी क्यों मिलती नहीं सफलता 
बनकर देवदूत कोई पूछता आकर मेरी कुशलता । 

कहाँ मंजिल है दूर कितनी मुझे रस्ता कोई बता दे 
ठहराव किस मोड़ पर सही मुझे उसका कोई पता दे । 
 
नींद हर गयी है किस कदर भूख ,प्यास मर गयी है 
विश्वास की डगर पर उपहास ,हर आस छल गयी है । 
 
चिंता चिता बनकर शनैः शनैः तन को कुतर रही है 
किसपे करूँ भरोसा शनैः शनैः थकी उम्र ढल रही है । 

क्या गुजर रही है हमपर पड़ा संकट है कितना भारी 
कहाँ हैं संकटमोचन,सियाराम,शिव,द्रौपदी के मुरारी । 

किसकी करूँ आराधना हर भगवान घूसखोर हो गए हैं 
लेते ना सुध हमारी बेसुध कहाँ आप चितचोर सो गए हैं । 

                                                                         शैल सिंह  

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