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Monday, October 28, 2013

उड़ान मेरी नजर से 


उड़ान वो चाहत है जो ,
मंजिल तक ले जाती है ।

उडान वो उमंग है जो ,
नईराह  दिखलाती है ।

उडान  वो हौशला है जो ,
लड़ना सिखलाती   है ।

उड़ान वो कर्म  है जो ,
क्षितिज पार  ले जाती है ।

उड़ान वो प्रयाश है जो ,
चलना सिखलाती है ।

उड़ान वो धर्म है जो ,
इंसानियत  सिखलाती है ।

उड़ान   हमारा  वो प्रयास  है जो ,
हारे  हुए को जीतना,
जीतने वालो को नए आयामों तक पहुचती है |  

रचनाकार..    .प्रदीप तिवारी 

pradeeptiwari.mca@gmail.com

2 comments:

कालीपद "प्रसाद" said...

बहुत सुन्दर परिभाषाएं हैं उड़ान के |
नई पोस्ट सपना और मैं (नायिका )

Tamasha-E-Zindagi said...

बहुत खूब