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Wednesday, July 24, 2013

कुछ बातें ऐसी भी



मोदी जी के बुर्का वाले शब्द भाषण को कांग्रेस इतना ज्यादा तूल क्यों दे रही है कांग्रेस ही क्यों सपा, बसपा ,लोजपा,जेडीयू इत्यादि भी प्रायः पंथनिरपेक्षता की नदी में डूबते उतराते रहते हैं ,जैसे लगता है कि ये लोग ही मुस्लिम भाई बहनों के सच्चे हिमायती और हितैषी हैं ,और पता नहीं ये वर्ग कब सचेत होगा ,राजनीति के धुरंधरों की राजनीतिक विसात पर बिछी छल छद्म की गोटियों से . आखिर यह समुदाय समझता क्यों नहीं कि धर्मनिरपेक्षता का लबादा ओढ़ने वाले इनका इस्तेमाल करते हैं ।यदि बुर्का शब्द मुस्लिम समुदाय पर हमला है तो साड़ी शब्द क्या है ,जिसे जयंती नटराजन ने कहा कि यदि मोदी साड़ी शब्द का प्रयोग करते तो इतनी आपत्ति नहीं होती ,इसका मतलब जयंती नटराजन ने हिन्दुओं को आहत किया साड़ी शब्द का वक्तव्य देकर . मोदी जी की लोकप्रियता से तथा भाजपा को अलग थलग रखने वाली पार्टियाँ बौखला सी गयी हैं ,क्या इन लोगों के सेकुलरिज्म की ढाल से हिन्दू समुदाय आहत नहीं होता। पहली बात तो हिन्दू,मुस्लिम जैसी भ्रान्ति की विकृत भावना नहीं फैलानी चाहिए ,यह हिंदुस्तान हैं इसके उद्यान के सभी पुष्प समान हैं ,आपसी तकरार को हवा कौन देता है ये सभी जानते हैं पहले रार कौन करता है ,बदले की भावना को उत्प्रेरित कौन करता है यह सभी जानते हैं खुद शांति और अमन की धज्जियाँ कौन उड़ाता है न चैन से स्वयं रहना न औरों को शांति से जीने देना , इस तरह का खलल कौन करता है यह सभी जानते हैं .अरे ऐसी ऐसी बातें ना कर जनता से खुद के विवेक का प्रयोग करने की नसीहत देनी चाहिए ना कि बार बार धर्म संप्रदाय की बातों से जनता को भड़काना चाहिए .गुजरात दंगा इन सभी को बहुत याद रहता है पर कार सेवकों का ट्रेन हादसा नहीं याद रहता ,किसको भरमाते हैं ये लोग ,जो अब जाग चुके हैं ,बहुत दुःख होता है जब निरपराध कार सेवकों की अकाल मौत पर एक हर्फ तक नहीं बोले जाते ,वाह रे चाटुकारों तुम्हारे जमीर की तो चटनी बना देनी चाहिए .बल्कि दोनों समुदायों को इस दर्द की अनुभूति होनी चाहिए .
   सारी ही पार्टियाँ भाजपा के विपरीत लामबंद हो जाती हैं पंथ निरपेक्षता की राग का आलाप करती हैं ऐसे समय पर तोहफों की वर्षात ,रिजर्वेशन की बातें ,तरह तरह के सब्ज वाग दिखाती हैं ,ऐसा नहीं है कि रिजर्वेशन की प्रक्रिया घातक नहीं है, एक वर्ग ऐसा भी है जिसको आघात पहुंचता है जिसकी होनहारी का हनन होता है . जब जब चुनाव नजदीक आते हैं अनुदानों का बम पटाखा फोड़ते हैं ये बेईमान,फिर काम तमाम हो जाने पर सारे ही वायदे फुस्स हो जाते हैं,फिर भी अकर्मण्य जनता नहीं चेतती . धिक्कार है उन हिन्दुओं के जमीर को जो इनका साथ देतीं हैं .देश की जनता को जागरुक होना चाहिए देश के विकास के लिए ,राष्ट्रचिंतन की भावना होनी चाहिये .  दुष्प्रचारों पर ध्यान ना देकर क्या उचित है क्या अनुचित इस पर अमल करना चाहिए . मोदी जी की,भाजपा की आलोचना और निंदा ही सभी पार्टियों का शगल बन गया है.सिर्फ मुस्लिम मतों को हासिल करने के लिए सारे हथकंडे अपना डाल रहे हैं . अरे अछूत तो इन काफिरों को घोषित कर देना चाहिए ,जो दिन रात भाईचारे की भावना को भड़काते हैं . ऐसे तो मुहावरों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जायेगा . समाचार देखने और सुनने का मन नहीं करता बिना मतलब ही हर बात की बाल की खाल निकालना .
    संप्रग और उसकी सहयोगी पार्टियों को मोदी का खौफ इतना है कि उनके मुंह से निकली हुई हवा का भी मुद्दा बना लेते हैं , मोदी जी को चाहने वालों सत्ता परिवर्तन के लिए कमर कस लो वरना मोदी के नाम की लहर उनको चाहने वालों की ऐसी आँधी फिर पता नहीं कब आये . ऐसे बेगैरत राजनीतिज्ञों की बेबुनियाद बातों पर ध्यान ना देकर देश के बिगड़ते हुए हालात पर अमल करो और अपने विवेक का सही इस्तेमाल करो ,सभी धर्म ,वर्ग ,समुदाय के लोग राष्ट्र धर्म को सर्वोपरि मानें तो बेहतर होगा और अपने बहुमूल्य मतों का दुरुपयोग ना कर भ्रष्टाचारियों को सबक सिखाएं . धर्म निर्पेक्षता और पंथ निर्पेक्षता की बात करने वाले उन्हीं को ठगते हैं जो उनकी चिकनी चुपड़ी बातों में आकर अपने बहुमूल्य वोटों से उन्हें संसद तक पहुंचाते हैं .एक दिन उनके भी दिमाग के कपाट खुलेंगे जिस दिन वो अपने दिल और दिमाग से नफरत का जहर निकाल देंगे और सही गलत का मूल्यांकन करना जान जायेंगे .              

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