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Friday, July 12, 2013

एक कदम तू चल तो सही :))



" तू चल तो सही अपने कदम,

हर हालत में कही न कही पहुच ही जायेगा.

बैठा रहेगा एक जगह पर तो,

वही पर रह जायेगा.

कदम छोटे ही भले ही चल,

मगर कदमो को रुकने मत दे,

नदी की तरह खुद अपने रास्ते बना लेगा.

कदमो को गर जरुरत पड़े तो थोडा विश्राम दे,

मगर एक जगह पर टिक अपने मंजिल से अपने को दूर मत कर.

चल चला चल कदमो से अपने कितनो के लिए रास्ते बनाता चल......!!!!


कारवां जारी है ब्लॉग से आनन्द मेहरा जी की एक बेहतरीन रचना आपके साथ साँझा कर रहा हूँ .....उम्मीद है आप सभी को पसंद आएगी  !


@ संजय भास्कर 

13 comments:

अज़ीज़ जौनपुरी said...

ati sundar prastuti

रविकर said...

बढ़िया प्रस्तुति आदरणीय-
शुभकामनायें-

vandan gupta said...

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार(13-7-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
सूचनार्थ!

कालीपद "प्रसाद" said...

प्रेरणा दायक रचना !
latest post केदारनाथ में प्रलय (२)

गुड्डोदादी said...

चल चला चल कदमो से अपने कितनो के लिए रास्ते बनाता चल......!!!!
बहुत भावुक

संजय भास्‍कर said...

aap sabhi ka bahut bahut shukriya

प्रतिभा सक्सेना said...

सुन्दर कथ्य !

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति said...

काफी दिनों बाद ब्लॉग मे संजय जी की रचना देखी .. बहुत अच्छा मेसेज देती है..

sushma verma said...

जिन्दगी के यथार्थ को बताती सार्थक अभिवयक्ति....

मेरा मन पंछी सा said...

बहुत ही सुन्दर और सार्थक रचना..
:-)

Unknown said...

प्रेरणाप्रद रचना .............

Anonymous said...

बहुत ही सुन्दर और सार्थक रचना.

Darshan jangra said...

बहुत ही सुन्दर और सार्थक रचना.