*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Sunday, June 9, 2013

प्रणय निवेदन-एक डाक्टरनी से


        प्रणय निवेदन-एक डाक्टरनी से 
    
     
दर पे तेरे आये है हम ,तुझसे कहने के लिये 
क्या तेरे दिल में जगह है ,मेरे रहने के लिये 
महबूबा डाक्टर थी,हंस के ये बोली डीयर 
मेरा दिल तो छोटा सा है,एक मुट्ठी बराबर 
और तुम तो छह फुटे हो,समा कैसे पाओगे 
तोड़ दोगे ,दिल मेरा, यदि उसमे बसने आओगे 
हमने बोल ठीक है,एहसान इतना कीजिये 
दिल नहीं तो कम से कम ,दिमाग में रख लीजिये 
'क्या मेरा दिमाग खाली'खफा हो उसने कहा 
डाक्टरी पढ़ ली तो फिर दिमाग क्या खाली रहा 
कहा हमने चाहते हम ,कहना दिल की बात है 
तुम मेरी  लख्ते -जिगर,ये प्यार के जज्बात है  
कहा उसने जिगर फिर तो तुम्हारा बेकार है 
टेस्ट लीवर का कराने की तुम्हे  दरकार है 
हमने बोल प्यार जतलाने का ये अंदाज है 
मेरी हर धड़कन में डीयर ,बस तुम्हारा वास है 
धडकता दिल,सांस से जब ,आती जाती है हवा 
मै हवा ना ,हकीकत हूँ,पलट कर उसने  कहा 
हमने बोला ,ये हमारे इश्क का  पैगाम  है 
मेरे खूं के हरेक कतरे में तुम्हारा  नाम है 
कहा उसने ,सीरियस ये बात है,कहते हो क्या 
टेस्ट ब्लड का कराना ,अब तो जरूरी हो गया 
हमने बोला  ,बस करो,मत झाड़ो अपनी डाक्टरी 
प्यार का इकरार करदो,झुका नज़रे मदभरी 
हंस वो बोली,बात दिल की,मेरे पापा से कहो 
हमारी शादी करादे ,साथ फिर मेरे   रहो 

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

 

1 comment:

sanny chauhan said...

बहुत अच्छा लगा इस ब्लॉग पर आकर

मेरे ब्लॉग पर भी आकर देखो शायद आपको पसंद आये

http://hinditech4u.blogspot.in/

http://websiteslinksfree.blogspot.in/