*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Saturday, June 15, 2013

देश की भलाई किसमें

                                         देश की भलाई किसमें  

आडवाणी जी की प्रासंगिकता कभी ख़त्त्म नहीं हो सकती वह भारतीय जनता पार्टी के आधार शिला है भाजपा की नींव हैं,मेरुदंड हैं,उनकी राजनीतिक अस्मिता को किसी भी दृष्टिकोंण से नकारा नहीं जा सकता। लेकिन उन्होंने अपनी उदारता का दान ना देकर अपनी लोकप्रियता का ग्राफ थोड़ा जरुर कम कर दिया। क्या बिरोधी और अपने पन का मिथक गिरगिटी रंग दिखाने वाले आडवाणी जी की प्रधानमंत्री के तख्त की दावेदारी को स्वीकार करते,,कत्तई नहीं तब भी ये चों-चों करते क्योंकि तमाशबीनों को अड़ंगा लगाने की आदत है,यह खुद आडवाणी जी,कुछ सिरफिरे लोग क्यों नहीं समझ रहे।  
आज जब पूरा देश मोदी मय हुआ है जहाँ आडवाणी जी के कुशल नेतृत्व की जरुरत है वहाँ आडवाणी जी ने अपनी मनःस्थिति जगजाहिर कर और अपनी नाराजगी षडयंत्र के तहत व्यक्त कर अच्छे भले बनते हुए समीकरण का मखौल उड़वा दिया है,उन्होंने ऐसी ऐतिहासिक भूल का परिचय दिया है जिसका खामियाजा देश को और देश वासियों को भुगतना पड़ेगा,जिन्हें भीष्म पितामह की भूमिका का निर्वहन करना चाहिए था उन्होंने अपनी स्वार्थपरता का बेढंगा परिचय दिया पहले आडवाणी जी ने ऐतिहासिक भूल की और अब नीतीश जी ऐतिहासिक भूल करने जा रहे हैं ,वो आज रावण जैसे मदान्ध हो गए हैं जो बिहार प्रगति के पथ पर अग्रसर हो रहा था उसे फिर से गर्त में धकेलने की कोशिश कर रहें हैं शायद उनको यह आभास नहीं है कि इसका फायदा किसको मिलेगा और नुकसान किसका होगा। जिन मतों को लुभाने की कोशिश में वह स्वांग रच रहे हैं वो ही उन्हें पटखनी दे देंगे। यदि नीतीश जी एन .डी .ए .की गठबंधन से अलग होते हैं तो समझिये कि उनके हाशिये पर जाने का समय आ गया है। मोदी जी को प्रधान मंत्री के पद पर आसीन देखना पार्टी से अधिक कहीं देश की समझदार युवा और बुद्धिजीवी जनता की चाहत है। मोदी जी में जो दक्षता और पारदर्शिता है उनके कद का जो विस्तार है उससे सभी राजनेता परिचित हैं। आज देश जिस कगार पर खड़ा है,जहाँ घोटाले पर घोटालों का पर्दाफास हो रहा है,इसके लिए जिम्मेदार कौन है,गूंगी बहरी अपाहिज सरकार की खामियां क्या देश की जनता नहीं देख रही है,ऐसे में एक कुशल शासक की अहम् भूमिका निभाने वाले कद्दावर नेता की जरुरत क्या जनता महसूस नहीं कर रही है। कुछ हद तक हम देश की जनता भी गलत चुनावों के उत्तरदायी हैं जो जाति-पांती,धर्म समुदाय के फर्क में बार बार देश की बागडोर निरंकुश शासकों के हाथ में सौंपकर देश की गिरती हुई शाख का मातम मनाते हैं और फिर दुबारा वही गलती दुहराते हैं। कब हम मूर्धन्य सचेत होंगे और खुद के निर्णय के हक़दार बनेंगे,कब लोक लुभावने वायदों के वशीभूत ना होकर अपने दिमाग का इस्तेमाल करेंगे। अब समय आ गया है अपनी भारत भूमि के लिए,आवाम के लिए,देश की तरक्की और उत्त्थान के लिए सही और स्वतन्त्र निर्णय लेने का। देश की महान जनता से एक आह्वान है कि जाति-पाँति,धर्म,समुदाय से ऊपर उठकर एक ऐसे महान भारत का निर्माण करें जो विश्व में एक अलग पहचान बनाये,विश्व के मानचित्र पर हिंदुस्तान के चरमोत्कर्ष का झंडा फहरायें,और यह तभी सम्भव है जब देश की जनता अपने सोच और विवेक को हर तरह के स्वार्थ से परे उठकर सिर्फ और सिर्फ देश की भलाई के लिए सोचे।                                                        
                                                                                            शैल सिंह                                   

No comments: